चलो दुकान में चुदाई करें pyasi chut

Antarvasna, hindi sex stories, pyasi chut: मैं अपनी दीदी के घर गया हुआ था दीदी से मिले हुए काफी समय हो गया था इसलिए मेरी मां ने दीदी से मिलने के लिए कहा था तो मैं दीदी से मिलने के लिए चला गया। मैं जब अपनी दीदी से मिला तो उस वक्त वहां पर संध्या भी आई हुई थी संध्या दीदी के पड़ोस में ही रहती है और उसका दीदी के घर अक्सर आना-जाना लगा रहता है। मैं संध्या को दिल ही दिल पसंद करता था लेकिन कभी भी मैंने संध्या से बात नहीं की थी यह पहला ही मौका था जब मैंने उस दिन संध्या से बात की। संध्या और मैं साथ में बैठे हुए थे तो दीदी कहने लगी कि मैं तुम दोनों के लिए अभी चाय बनाकर लेकर आती हूं दीदी रसोई में चाय बनाने के लिए चली गई और जब दीदी रसोई में चाय बनाने के लिए गई तो उस वक्त संध्या ने मुझसे बात की। मैं संध्या से बात कर के काफी खुश था और संध्या भी मुझसे बात कर के बहुत खुश हो रही थी दीदी थोड़ी देर में चाय बना कर ले आई तो वह मुझे कहने लगी कि विवेक तुम आज यहीं रुक जाना।

मैंने दीदी को कहा नहीं दीदी मैं आज यहां नहीं रुक पाऊंगा क्योंकि कल मुझे एक जरूरी काम है दीदी ने मुझे दोबारा से वही बात कही तो मैंने भी सोचा कि आज यहीं रुक जाता हूं मैं उस दिन दीदी के पास ही रुकने वाला था। जीजा जी भी अपने किसी काम से गए हुए थे और वह देर रात घर लौटने वाले थे हम लोग चाय पी रहे थे और चाय पीते पीते बात कर रहे थे तो संध्या ने उस वक्त बताया कि उसकी जॉब एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग चुकी है संध्या की जॉब कुछ समय पहले ही लगी थी। यह पहली ही बाहर था जब मैं संध्या से बात कर रहा था इसलिए मुझे उससे बात करना बहुत ही अच्छा लग रहा था थोड़ी देर बाद संध्या भी चली गई तो दीदी और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने दीदी से कहा कि मुझे तो काफी तेज भूख लग रही है आप मेरे लिए खाना बना दीजिए। दीदी ने कहा कि विवेक मैं तुम्हारे लिए अभी खाना बना देती हूं दीदी मेरे लिए खाना बनाने के लिए रसोई में चली गई।

दीदी और मैं ही घर पर थे दीदी के ससुर जी घर पर नहीं थे और उनकी सासु मां का देहांत काफी पहले ही हो चुका था जीजा जी घर में एकलौते हैं। दीदी ने मेरे लिए खाना बना दिया था और हम दोनों ने साथ में बैठकर उस दिन दोपहर में लंच किया। मेरे दिमाग में सिर्फ संध्या को लेकर बात चल रही थी मैं संध्या के बारे में सोच रहा था शाम के वक्त मैं दीदी को यह कहकर घर से निकला कि मैं थोड़ी देर में लौट आऊंगा लेकिन जब मैं बाहर गया तो मैंने देखा संध्या मेरे आगे चल रही थी मैंने संध्या को आवाज देते हुए रोका तो उसने पीछे पलटकर देखा। जब उसने पीछे पलटकर देखा तो मैंने संध्या से पूछा कि तुम कहां जा रही हो वह मुझे कहने लगी कि मैं अपनी सहेली के घर जा रही थी। मैंने संध्या को कहा क्या तुम्हारी सहेली यही पास में रहती है तो वह कहने लगी कि हां वह यहीं पास में रहती है। हम दोनों बात करते-करते सोसायटी के गेट तक पहुंचे और उसके बाद संध्या कहने लगी कि मैं अब चलती हूं संध्या वहां से अपनी सहेली के घर चली गई और मैं वहां से आगे चलता हुआ काफी आगे तक निकल गया था। दीदी ने मुझे फोन किया और वह पूछने लगी कि विवेक तुम कब तक लौटेंगे मैंने दीदी को कहा कि दीदी बस अभी थोड़ी देर में लौट आऊंगा और मैं थोड़ी देर के बाद घर वापस लौट आया। मैं जब घर वापस लौटा तो मैंने दीदी को पूछा कि दीदी अभी तक जीजा जी नहीं आए तो दीदी ने मुझे कहा कि नहीं वह अभी तक नहीं आए हैं उन्हें आने में अभी थोड़ा वक्त और लगेगा। मैं और दीदी साथ में ही थे हम लोग जीजा जी का इंतजार कर रहे थे और जब जीजा जी घर आए तो मैंने उनसे कहा कि जीजा जी आपको आने में आज काफी समय लग गया तो वह मुझसे कहने लगे कि हां विवेक मुझे आज कुछ जरूरी काम था इस वजह से मुझे घर आने में देर हो गई। मैं और जीजा जी साथ में बात कर रहे थे वह मुझसे कहने लगे कि विवेक तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो मैंने उन्हें बताया कि मेरा काम भी अच्छा चल रहा है कुछ समय पहले ही पापा ने मेरे लिए एक नई दुकान शुरू की थी। हमारा गारमेंट का काम है और थोड़े समय पहले ही पापा ने मेरे लिए एक नई दुकान चालू की थी और मैं उस दुकान पर ही ज्यादातर समय बिताया करता। जीजा जी से मेरी काफी देर तक बात हुई और अगले दिन मैं अपने घर वापस लौट आया।

मैं जब अपने घर वापस लौटा तो मैं जल्दी से तैयार होकर अपनी दुकान पर चला गया मैं अपनी दुकान के लिए घर से निकला तो उस वक्त 11:00 बज रहे थे। मैं जैसे ही दुकान पर पहुंचा तो मुझे पापा का फोन आया क्योंकि पापा सुबह ही दुकान पर निकल चुके थे तो पापा ने मुझे कहा कि बेटा मैं तुम्हें कुछ पैसे रामू के हाथों भिजवा रहा हूं तो तुम वह पैसे महेश जी को दे देना मैंने उन्हें कहा ठीक है पापा आप पैसे भिजवा दीजिए। रामू हमारी दुकान में काफी वर्षों से काम करता आया है और वह काफी ईमानदार है, रामू थोड़ी देर बाद पैसे लेकर दुकान पर पहुंचा जब वह दुकान पर पैसे लेकर पहुंचा तो उसने मुझे वह पैसे पकड़ा दिए और उसके बाद वह चला गया। जब दुकान में महेश जी आए तो उन्हें मैंने वह पैसे दिए और वह कुछ देर दुकान में बैठे रहे फिर वह चले गए। मैंने पापा को फोन कर के बता दिया था कि मैंने महेश जी को पैसे दे दिए हैं उन्होंने मुझसे कहा कि ठीक है बेटा यदि तुमने उन्हें पैसे दे दिए हैं तो यह तुम ने काफी अच्छा किया। पापा ने कुछ समय पहले उनसे पैसे लिए थे और अब वह पैसे उन्होंने महेश जी को लौटा दिए थे।

मैं एक दिन दुकान में ही था उस दिन मैंने देखा संध्या मेरी दुकान में आई हुई थी। जब संध्या को मैंने देखा तो मैंने उससे बात की, संध्या के लंबे बाल और उसकी जुल्फें देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश था और सबसे ज्यादा खुशी मुझे इस बात की थी की मै संध्या के साथ बात कर रहा हूं। संध्या ने मुझे बताया कि वह अपनी शॉपिंग के लिए आई हुई थी। मैं संध्या को अपने दोस्त की दुकान मे ले गया जब मै उसको दुकान मे ले गया तो उसने वहां से शॉपिंग कर ली थी। उसके बाद जब भी संध्या आती तो मैं उसे शॉपिंग करवा दिया करता। मै संध्या को गिफ्ट देने लगा था जिस से की संध्या बहुत ज्यादा खुश रहती थी वह अक्सर मुझसे मिलने के लिए आती ही रहती थी। एक दिन मैंने संध्या से कहा क्या तुम मेरे साथ मूवी देखने के लिए चलोगी? संध्या मेरी बात मान गई जब उस दिन हम दोनों मूवी देख रहे थे तो मैंने संध्या की जांघ पर हाथ रखा और उसके स्तनों को मैं दबाने लगा। मैं जब उसके स्तनों को दबा रहा था तो उसे भी अच्छा महसूस हो रहा था और वह बहुत ज्यादा खुश थी उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे और भी ज्यादा अच्छा लगने लगा। वह जब मेरे होठों को चूम रही थी तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ रही थी उसने मेरी गर्मी को इतना बड़ा कर रख दिया था कि मैंने उसे कहा मुझे लगता है कि तुम्हारी चूत आज मारनी पड़ेगी। वह इस बात से मुस्कुराने लगी और कहने लगी लेकिन हम लोग कहां जाएंगे। मैंने उसे कहा हम लोग मेरी दुकान में चलते हैं मैं संध्या को अपने साथ अपनी शॉप पर ले आया। जब मैं उसे वहां पर लाया तो हम लोग मेरी दुकान के अंदर रूम में चले गए मेरी दुकान के अंदर ही एक छोटा सा कमरा है वहां पर जब मैं संध्या के बदन को महसूस कर रहा था और उसके कपड़े उतारकर उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। उसके स्तनों को दबाकर मे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रहा था मैंने अब संध्या के स्तनों को अपने मुंह मे लेना शुरू किया मैं उसके कपड़ों को उतार चुका था वह मेरे सामने नंगी थी।

उसका दूध जैसा बदन और उसकी बड़ी गांड को मैं दबा रहा था मैंने जब उसकी चूत के अंदर उंगली डालने की कोशिश की तो मेरी उंगली उसकी चूत में नहीं जा रही थी। उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और अपने मुंह के अंदर उसे लेकर चूसना शुरू किया वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कि मेरे लंड से सारा माल बाहर निकाल कर ही छोडगी और उसने ऐसा ही किया। काफी देर तक उसने मेरे लंड को अपने मुंह मे लिया उसने बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूसा मै बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया। जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को लगाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और उसकी चूत के अंदर मेरा लंड जा चुका था। मैं उसके ऊपर से लेटा हुआ था वह अपने पैरों को खोल रही थी जब वह अपने पैरों को खोल रही थी तो मैं उसके चेहरे की तरफ देख रहा था उसके चेहरे पर एक अलग ही प्रकार की खुशी नजर आ रही थी और वह अपने पैरों को खोल रही थी।

मैं जब उसकी चूत के अंदर बाहर लंड को करता तो वह अपने पैरों को खोलती जिसके बाद मुझे उसे चोदने मे बहुत मजा आ रहा था। उसकी चूत के अंदर तक मेरा लंड जा रहा था मैं जिस प्रकार से उसको चोदता उससे वह बहुत ज्यादा खुश हो रही थी और मुझे कहने लगी मेरी चूत तुम ऐसे ही मारते रहो। मैंने उसकी चूत का मजा बहुत देर तक लिया। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था। मुझे लगने लगा मैं उसकी चूत की गर्मी को ज्यादा देर तक नहीं झेल पाऊंगा मैंने अपने लंड को बाहर निकाल कर संध्या के मुंह के अंदर डाला। उसने मेरे लंड को बहुत देर तक चूसा वह मेरे लंड को चूस रही थी तो उसके मुंह के अंदर ही मैंने अपने वीर्य को गिरा दिया उसके मुंह मे जो वीर्य गिरा मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था जिस प्रकार से मैंने उसके साथ सेक्स के मज़े लिए जिससे वह भी बहुत ज्यादा खुश थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.