पेलकर रेल कर दिया antarvasna

Antarvasna, hindi sex stories: मैं कुछ दिनों से बहुत परेशान चल रहा था तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपने घर हो आऊं उसके बाद मैं अपने घर लखनऊ चला आया। मैं जब अपने घर लखनऊ आया तो मेरे पापा मुझे कहने लगे कि रोहित बेटा अगर तुम्हारी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है तो तुम यहीं हमारे साथ क्यो नही रहते। पापा ने मुझे ना जाने कितनी ही बार इस बारे में कहा था लेकिन उस वक्त मैं अपनी जॉब से खुश था परंतु कुछ समय से मैं अपनी नौकरी से बिल्कुल भी खुश नहीं था क्योंकि ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम होने लगा था और मैं मानसिक रूप से भी काफी ज्यादा परेशान होने लगा था इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने पापा मम्मी के पास चला आया।

मेरे पापा मुझे हमेशा से ही सपोर्ट करते हैं और वह मुझे हमेशा ही कहते हैं कि बेटा तुम्हें जब भी किसी चीज की जरूरत हो तो तुम मुझे बता दिया करो। मैंने भी अपना पूरा मन बना लिया था कि मैं अब दिल्ली में जॉब नहीं करूंगा मैं अपनी फैमिली के साथ ही लखनऊ में रहूंगा इसलिए मैंने अपना ऑफिस छोड़ दिया और मैं अपने परिवार के साथ लखनऊ में रहने लगा। जब मैं लखनऊ आया तो मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या तो यह थी कि मैं घर पर क्या करूंगा क्योंकि मेरे पास तो फिलहाल कुछ भी करने के लिए नहीं था फिर मैंने अपने दोस्त की मदद से एक काम शुरू करने की सोची। मैंने कुछ पैसे अपनी नौकरी के दौरान सेविंग किए थे तो वही पैसे मैं अपने बिजनेस में लगाना चाहता था इसलिए मैंने एक छोटा सा कारोबार खोला। मैंने अपने मसाले का कारोबार शुरू किया और यह सब मेरे दोस्त की मदद से हुआ था मेरा काम भी अब अच्छा चलने लगा था। थोड़े ही समय में मुझे काफी तरक्की मिल गई थी मैंने इतनी उम्मीद भी नहीं की थी लेकिन अब सब कुछ ठीक चलने लगा था तो मैं भी काफी खुश था और मेरे परिवार वाले भी मुझसे बहुत खुश थे। एक दिन मैं घर पर ही था तो उस दिन मेरी बहन आई हुई थी मेरी बहन जिसकी शादी लखनऊ में ही हुई है।

मेरे जीजाजी एक बड़े अधिकारी हैं वह भी उस दिन दीदी के साथ घर पर आए हुए थे और वह सब लोग मेरी तरक्की से बड़े खुश थे। मेरी दीदी मुझे कहने लगी कि रोहित तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम दिल्ली से लखनऊ आ गए और लखनऊ में पापा मम्मी को तुम्हारे साथ की भी जरूरत थी। पापा भी कुछ दिनों बाद रिटायर होने वाले थे तो पापा चाहते थे कि उनके रिटायरमेंट की पार्टी में हम अपने सारे रिश्तेदारों को इनवाइट करें और पापा ने इसका सारा जिम्मा मुझे ही सौंपा। वह कहने लगे कि रोहित बेटा अब तुम्हें ही सारी जिम्मेदारी को संभालना है मैंने उन्हें कहा कि पापा आप बिल्कुल भी चिंता ना करे यह काम मैं बखूबी निभा लूंगा। मैंने पापा की रिटायरमेंट की पार्टी के लिए सारी व्यवस्था कर दी थी मैंने एक होटल में हॉल बुक करवा लिया था और सब कुछ बड़े अच्छे से हुआ। पापा की रिटायरमेंट की पार्टी में सब लोग बहुत खुश थे और हमारे सभी रिश्तेदार आए हुए थे। हमारे परिवार में किसी भी चीज की कमी नहीं थी और मेरी जिंदगी भी लखनऊ में आकर बदल चुकी थी। एक दिन मैं अपने दोस्त के साथ उसके घर पर गया हुआ था जब मैं उसके घर से लौट रहा था तो मैंने उसकी कॉलोनी में एक लड़की को देखा जिसे देखते ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं उसे जानता हूं या उससे पहले भी मैंने उसे कहीं देखा है लेकिन मुझे यह ध्यान नहीं आ रहा था कि मैंने उसे देखा कहां है। मुझे नहीं पता था कि उस लड़की से मेरी दोबारा से मुलाकात हो जाएगी और जब उस लड़की से मेरी दोबारा मुलाकात हुई तो उसके बाद मुझे ध्यान आया कि हम लोग पहले भी मिल चुके हैं मैं उससे दिल्ली में मिला था। मैंने उस लड़की से पूछा कि क्या पहले तुम दिल्ली में जॉब किया करती थी तो वह मुझे कहने लगी की हां। उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम नीलम है। मैंने नीलम से कहा कि हम लोगों की इससे पहले भी एक बार मुलाकात हुई थी तो नीलम मुझे कहने लगी कि हां हम लोगों की दिल्ली में मुलाकात हुई थी मेरी सहेली जो कि आपके ऑफिस में जॉब करती थी उसने मुझे आपसे एक बार मिलवाया था। मैंने नीलम को पहचान लिया था और उसके बाद मैंने नीलम से पूछा कि क्या आप भी यहीं लखनऊ में जॉब करती है। वह मुझे कहने लगी कि नहीं मैं दिल्ली में जॉब करती थी लेकिन अब मैने जॉब छोड़ दी है मैं यहां अपने घर पर ही रहती हूं और बच्चों को ट्यूशन पढ़ा दिया करती हूँ।

नीलम का मैंने नंबर ले लिया था नीलम से मेरी बाते बढ़ने लगी थी हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आ चुके थे और हम दोनों एक दूसरे से प्यार भी करने लगे थे। हमारी दोस्ती प्यार में तब्दील हो चुकी थी और मुझे नीलम का साथ पाकर बहुत ही अच्छा लग रहा था नीलम मेरा बहुत ही अच्छे से ध्यान रखती। सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था नीलम और मैं एक दूसरे के साथ अपने रिलेशन से बहुत ही ज्यादा खुश थे। नीलम को एक दिन मैंने सुबह फोन किया तो नीलम मुझे कहने लगी कि रोहित आज मैं तुमसे बात नहीं कर पाऊंगी। मैंने नीलम से पूछा कि आखिर तुम मुझसे क्यों बात नहीं कर पाओगी तो वह मुझे कहने लगी कि आज पापा की तबीयत ठीक नहीं है और पापा बहुत ज्यादा बीमार है इसलिए आज हम लोग पापा को हॉस्पिटल लेकर जा रहे हैं। मैंने नीलम को कहा कि ठीक है अगर तुम्हें समय मिला तो तुम मुझे फोन कर देना नीलम ने मुझे रात को फोन किया तो मैंने उससे पूछा की तुम्हारे पापा की तबीयत कैसी है उसने मुझे बताया कि पापा की तबीयत तो ठीक है लेकिन उन्हें डॉक्टर ने घर पर आराम करने के लिए कहा है। मैंने नीलम से कहा की तुम्हारे पापा को क्या हो गया था तो वह मुझे कहने लगी कि पापा की अचानक से तबीयत बिगड़ गई और मुझे भी नहीं पता कि उन्हें अचानक से क्या हो गया लेकिन अब वह थोड़ा ठीक है डॉक्टर ने उन्हें घर पर आराम करने के लिए कहा है।

मेरी और नीलम की बात हो नहीं पाई क्योंकि नीलम बहुत ज्यादा थक चुकी थी उसने मुझे कहा कि अभी मैं फोन रखती हूं मैं तुमसे कल बात करूंगी। अगले दिन हम दोनों एक दूसरे को मिलने वाले थे जब मैं नीलम से मिला तो वह बहुत परेशान लग रही थी उसे अपने पापा की चिंता सता रही थी। मैंने नीलम को समझाया और कहा कि देखो तुम परेशान मत हो सब कुछ ठीक हो जाएगा और बेवजह ही तुम परेशान हो रही हो। नीलम कहने लगी रोहित मैं जब भी तुमसे बात करती हूँ तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और अब मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरी परेशानी पल भर में ही दूर हो गई हो। नीलम और मैं काफी देर तक बैठे रहे फिर वह चली गई। एक दिन नीलम और मै पार्क में बैठे हुए थे उस दिन जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मेरा हाथ बार-बार नीलम की जांघ पर लग रहा था इससे पहले मैंने कभी भी नीलम के बारे में ऐसा कुछ सोचा नहीं था लेकिन उस दिन उसको देखकर मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा। मेरा उसे चोदने का मन होने लगा वह भी मेरे लंड को चूत मे लेने के लिए तड़प रही थी मैंने उसे कहा हम लोगों को कहीं चलना चाहिए मुझसे तो बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था इसलिए मैं नीलम को अपने साथ अपने दोस्त के घर ले गया। मैं उसे अपने दोस्त के घर ले गया तो नीलम बिल्कुल भी रह ना पाई और मुझे कहने लगी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने नीलम के सामने अपने लंड को किया तो उसने मेरे लंड को हिलाते हुए अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे बडा अच्छा लगने लगा जब मचलने लगी थी मुझे बड़ा आनंद आ रहा था।

वह मुझे कहने लगी मुझे तुम्हारे मोटे लंड को चूसने में बड़ा ही आनंद आ रहा है। मैने नीलम को कहा मुझे भी बड़ा मजा आ गया वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी क्योंकि उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल लिया था मेरा लंड उसकी चूत के अंदर जा चुका था इसलिए उसकी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी वह मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगी। जब उसने मेरे सामने अपने कपडे उतारे तो वह पूरी तरीके से नग्न अवस्था मे हो चुकी थी उसके नंगे बदन को देखकर मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने उसे कहा मेरा लंड तुम्हारी चूत के अंदर जाना चाहता है। नीलम तैयार हो चुकी थी अब वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग को तुमने आज बढा दिया है अब मेरी चूत को तुम अपना बना लो। मैंने उसे कहा मैं अभी तुम्हारी चूत मारकर तुम्हारी खुजली को मिटा देता हूं। मैंने नीलम की चूत पर अपनी जीभ को लगाकर चाटना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से मजे मे थी।

वह मुझे कहने लगी मेरी चूत की गर्मी बाहर आ चुकी है। मैंने नीलम से कहा तुम्हारी चूत से बहुत ज्यादा पानी बह रहा है तो वह कहने लगी तुम मेरी चूत में लंड को घुसा दो। मैंने नीलम की योनि पर अपने लंड को लगाया तो नीलम की गरम चूत पर मेरा गरमा-गरम लंड लगा तो वह बहुत ही ज्यादा चिल्लाने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने जैसे ही उसकी योनि में अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्ला रही थी। नीलम की योनि से खून बाहर निकाले लगा मुझे मज़ा आने लगा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी अब तुम मेरी चूत पर अपने लंड को अंदर बाहर करते रहो। मैंने उसकी योनि के अंदर बाहर बहुत देर तक अपने लंड को किया जब उसकी चूत से पानी कुछ ज्यादा ही बाहर निकल आया तो मैं समझ चुका था कि अब वह रह नहीं पाएगी। उसने भी मुझे अपने पैरों के बीच मे जकडना शुरू कर दिया मैंने भी अपने माल को उसकी चूत मे गिराकर अपने अंदर की आग को शांत कर दिया था।

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