मुंह खोल लंड अंदर ले लिया

Antarvasna, hindi sex kahani: मेरा ट्रांसफर कुछ समय पहले ही गाजियाबाद में हुआ और मैं गजियाबाद जाने की तैयारी में था क्योंकि मुझे गाजियाबाद में अपने ऑफिस को ज्वाइन करना था। मैं एक सरकारी विभाग में नौकरी करता हूं और पिछले 4 सालों से मैं नौकरी कर रहा हूँ काफी समय तक चंडीगढ़ में रहने के बाद अब गाजियाबाद जाना पड़ रहा था इसलिए मुझे अपनी कुछ पुरानी यादों को भी चंडीगढ़ ही छोड़ना पड़ा। चंडीगढ़ में मेरी काफी अच्छी दोस्ती भी हो गई थी और आस पड़ोस में काफी लोग पहचानने भी लगे थे लेकिन अब मजबूरी थी कि मुझे गाजियाबाद जाना था। गाजियाबाद में ही मेरे एक दोस्त रहते हैं मैंने उन्हें फोन पर कहा कि क्या आप मुझे कोई घर दिलवा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि हां मैं आपको बता दूंगा। उन्होंने जब मुझे बताया तो मैंने उन्हें कहा कि ठीक है मैं कुछ दिनों बाद गाजियाबाद आ जाऊंगा और मैं कुछ दिनों बाद गाजियाबाद चला गया।

कुछ दिनों तक मैं अपने उन्हीं दोस्त के घर रुका था हालांकि उनसे मेरी इतनी अच्छी भी दोस्ती नहीं थी क्योंकि मेरा परिचय उनसे मेरे चचेरे भाई ने करवाया था। मैं कुछ दिनों तक उनके घर पर ही रहा और उसके बाद मैंने अपना सामान शिफ्ट कर लिया था और मैं अलग घर में रहने के लिए आ गया था। आस पड़ोस में सब लोग बहुत ही अच्छे थे थोड़े समय बाद उन लोगों से भी मेरी अच्छी बातचीत होने लगी क्योंकि मेरा स्वभाव ही ऐसा है कि जहां भी मैं जाता हूं वहां सब लोगों से बात कर लेता हूं शायद यही कारण है कि मुझसे लोग जल्दी घुलने मिलने लग जाते हैं। हर रोज मैं अपने दफ्तर सुबह घर से निकल जाया करता हूं मैं अपने दफ्तर बस से ही जाया करता था क्योंकि मेरे घर से दफ्तर की दूरी ज्यादा नहीं थी इसलिए मैं रोज बस से ही जाया करता। एक दिन मैं बस का इंतजार कर रहा था लेकिन उस दिन बस आई नहीं थी मुझे बस स्टॉप पर करीब 15 मिनट हो चुके थे और वहां पर काफी ज्यादा भीड़ भी हो चुकी थी। मैं यह सोच रहा था कि बस पता नहीं कितनी देर में आएगी क्योंकि मुझे मेरे काम पर जाने के लिए देर हो रही थी।

मैं सोच रहा था कि मैं किसी टैक्सी वाले को रोक कर वहां से अपने ऑफिस चला जाऊं लेकिन तभी मुझे बस आती हुई दिखी और बस जैसे ही बस स्टॉप पर रुकी तो सब लोग धक्का-मुक्की करने लगे क्योंकि बस काफी देर बाद आई थी और काफी ज्यादा भीड़ भी हो गई थी। उस वक्त सब लोगों के ऑफिस जाने का समय होता है शायद इसी वजह से बस स्टॉप पर कुछ ज्यादा ही भीड़ हो गई थी। किसी प्रकार से मैं भी धक्का-मुक्की करता हुआ बस के अंदर चढ़ गया और जब मैं बस के अंदर घुसा तो वहां पर काफी ज्यादा भीड़ थी मुझे हिलने की जगह भी नहीं मिल पा रही थी। किसी तरीके से मैंने भी अपनी जेब में हाथ डालकर पैसे निकाले जब थोड़ी देर बाद ही कंडक्टर मेरे पास आया तो मैंने उसे पैसे दिए और उसने मुझे टिकट दे दी। काफी देर तक तो मैं खड़ा रहा लेकिन जैसे ही मैं बस से उतरा तो मैंने देखा कि मेरे आगे ही एक लड़की उतरी है उसे देख कर मैं सोचने लगा कि क्या मैं उसे जानता हूं क्योंकि उसकी शक्ल मुझे ऐसी लगी कि जैसे मैंने उसे कहीं पहले भी देखा है। मैं यही सोच रहा था कि तभी वह एकदम से रुकी और पीछे मुड़ी वह कहने लगी कि क्या आप अमन हैं तो मैंने उसे कहा हां मेरा नाम अमन है मैंने उसे कहा लेकिन मैंने आपको पहचाना नहीं परन्तु मुझे ऐसा लग रहा है कि शायद इससे पहले मैंने आपको कहीं देखा है। वह कहने लगी कि मैं आपकी बहन की सहेली नैना हूं और आपकी बहन बबीता ने हीं मुझे एक दिन आपसे मिलवाया था। मैंने नैना से कहा क्या आप भी नौकरी करती हैं तो वह कहने लगी कि हमारा परिवार भी गाजियाबाद में ही शिफ्ट हो चुका है और मैं यही जॉब करती हूं। मैं और नैना साथ साथ चल रहे थे नैना मुझसे बातें कर रही थी तो मैंने भी नैना को बताया कि कुछ समय पहले ही मैं यहां पर आया हूं मेरा ट्रांसफर गाजियाबाद में ही हो गया था। मैंने नैना से कहा कि क्या तुम्हारी बात बबीता से होती है तो वह कहने लगी कि हां बबीता से तो मेरी बात होती ही रहती है। मुझे तो अभी भी यकीन नहीं आ रहा था कि नैना मुझे कभी गाजियाबाद में मिल सकती है नैना का ऑफिस आ चुका था और वह मुझे कहने लगी की अमन अभी मैं चलती हूं और वह वहां से चली गई। मैं भी अपने ऑफिस पहुंच चुका था जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उसके बाद मैं वहां से शाम को घर लौट आया और अब हर रोज मैं नैना को मिलने लगा था वह मुझे हर रोज मिला करती थी।

एक दिन मेरा जन्मदिन था और उस दिन मैं अकेला ही था मैं काफी अकेला महसूस कर रहा था तो उस दिन मुझे नैना मिली मैं अपने ऑफिस जा रहा था तो नैना मुझे बस में मिली। मैंने नैना से कहा कि क्या तुम मेरे साथ आज शाम को कुछ देर समय बिता सकती हो तो नैना कहने लगी क्यों नहीं और उस दिन नैना और मैंने साथ में मूवी देखी और फिर हम लोगों ने कुछ देर साथ में समय बिताया उसके बाद मैं अपने घर चला आया था। अगले दिन नैना ने मुझे गिफ्ट दिया और कहने लगी कि कल मुझे आप के बर्थडे का पता नहीं था इसलिए मैं कल आपको कोई भी गिफ्ट नहीं दे पाई। मैंने नैना को कहा कि लेकिन तुम्हें इसकी कोई जरूरत नहीं थी परंतु नैना ने मुझे कहा कि आप रख लीजिए और मैंने वह गिफ्ट रख लिया, नैना और मैं हर रोज मिला करते थे।

नैना ने एक दिन मुझसे कहा मुझे तुमसे मिलना है मैंने नैनो को अपने घर पर ही बुला लिया क्योंकि उस दिन मेरी छुट्टी थी इसलिए मैं घर पर ही था। नैना और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने नैना के बारे में कभी भी ऐसा ख्याल अपने दिमाग में पैदा नहीं किया था लेकिन उस दिन उसका गोरा बदन कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रहा था और उसके खुले हुए बाल तो मुझे अपनी और पूरी तरीके से खीच रहे थे। मैंने भी सोच लिया था कि अब मैं नैना के होठों को चूम लूंगा शायद मेरे अंदर से एक अलग ही प्रकार की उत्तेजना पैदा हो रही थी जिसे मैं बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। मैंने नैना के होठों को चूम लिया मेरे ऐसा करने पर नैना बहुत ज्यादा खुश हो गई और कहने लगी अमन क्या तुम मुझसे प्यार करने लगे हो? मैंने उसे कहा मुझे यह तो नहीं पता लेकिन तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो परंतु उस वक्त तो हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आने के लिए बेताब थे जब नैना मेरी बाहों में आई तो मैं उसके स्तनों को दबाने लगा। वह भी मेरे बदन को महसूस करने लगी थी वह मेरी बाहों में आकर अपने आपको बहुत अच्छा महसूस कर रही थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आ चुके थे मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया जब मैंने ऐसा किया तो वह मेरी तरफ देखने लगी और मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था जिस कारण वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी। मैंने उसके बदन से कपड़े उतारने शुरू किए मैंने जब उसकी पैंटी और ब्रा उतारे तो मैं उसके स्तनों को देखकर अपने मुंह में लेने लगा। उसके बूब्स को मैं अपने मुंह में लेकर चूस रहा था जब उसके निप्पलो को मैं अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करता तो मुझे मजा आता और वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती। सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था हम दोनों बहुत ज्यादा खुश हो चुके थे मैंने उसके पैरों को खोला और जब मैंने उसके पैरों को खोलकर उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो नैना की चूत से पानी बाहर निकलने लगा था वह बिल्कुल रह नहीं पा रही थी। मैंने अपने लंड को उसकी चूत से रगडना शुरु किया जिस कारण उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत अधिक होने लगा था और वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

उसकी चूत मेरे मोटे लंड को लेने के लिए तैयार थी अब मैंने उसके पैरों को खोलकर उसकी चूत के अंदर तक अपने लंड को घुसा दिया था जैसे ही मैंने ऐसा किया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और एक ही झटके में मेरा लोड उसकी योनि के अंदर जा चुका था जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर की तरफ गया तो वह जोर से चिल्ला कर मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकलने लगा है। मैंने जब अपने लंड पर देखा तो उस पर खून लगा हुआ था लेकिन मैं खुश था कि मैं नैना की सील पैक चूत मै मार पाया। उसकी चूत मारकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और उसकी चूत पर मै तेजी से प्रहार करने लगा कुछ देर तक ऐसे ही मैंने उसे चोदा। जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर धक्के देना शुरू किया तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़ी तेजी से किया और वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। काफी देर ऐसा करने के बाद मुझे लगने लगा मेरे माल गिरने वाला है।

मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया और उसकी इच्छा को पूरा कर दिया लेकिन थोड़ी देर बाद उसके साथ सेक्स करने का मन होने लगा। कुछ देर हम दोनों साथ में बैठे रहे उसने कहा मुझे तुम्हारे लंड को मुंह में लेना है उसने मेरे मोटा लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और अच्छे से उसे मुंह के अंदर लेने लगी। जब वह अपने मुंह के अंदर मेरा लंड को लेकर चूसती तो मुझे अच्छा लग रहा था और उसके बाद जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाने लगी। अब मैं उसे बडे तेजी से चोद रहा था। वह कहने लगी मुझे तो मैं मजा आ रहा है और काफी देर तक मैंने उसकी चूतृका आनंद लिया लेकिन जब मेरी इच्छा पूरी हो गई तो मैंने उसे कहा मजा आ गया। वह बहुत ज्यादा खुश थी उसके बाद भी नैना से मेरे शारीरीक संबंध बनता है और हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा सेक्स संबंध बनाया करते है।

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