वह मदमस्त कली मेरे कमरे मे थी

Antarvasna, hindi sex stories: मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं अहमदाबाद में मेरे पिताजी का ज्वेलरी का कारोबार है और हम लोगों की ज्वेलरी शॉप का काम पापा ही देखते हैं। पापा चाहते थे कि मैं भी उनके साथ काम सम्भाल लूं लेकिन मैंने कुछ समय तक नौकरी करना ही ठीक समझा और करीब दो वर्षों तक मैंने जॉब की और उसके बाद मैंने नौकरी छोड़कर पापा का काम संभाल लिया था। अब मैं पापा का काम संभालने लगा था इसलिए पापा कम ही दुकान पर आया करते थे मैं ही दुकान पर ज्यादातर रहता था मेरे लिए अब अपने लिए भी समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता था मैं सिर्फ अपने दोस्तों से फेसबुक के माध्यम से ही जुड़ा हुआ था और फेसबुक पर ही मुझे पता चलता रहता था कि उनके जीवन में क्या चल रहा है। मेरे जीवन में कुछ भी नया नहीं था हर रोज सुबह मैं घर से दुकान के लिए निकलता और फिर शाम के वक्त मैं घर चला जाता जिंदगी बिल्कुल एक जैसी ही चल रही थी और नया कुछ भी नहीं था। जब मेरा दोस्त कमल मेरी दुकान पर आया तो उसने मुझे कहा कि संजय तुम काफी दिनों से मुझे मिले नहीं थे तो सोचा कि तुमसे मिलने आज तुम्हारी दुकान पर ही आ जाऊं।

मैं और कमल साथ में ही बैठे हुए थे मैंने दुकान में काम करने वाले बंटी से कहा कि बंटी तुम जा कर दो चाय का आर्डर दे दो। हमारी दुकान के बिल्कुल सामने ही एक चाय वाले की दुकान है वहां से बंटी थोड़ी देर में चाय ले आया हम दोनों अब चाय पीते पीते बात कर रहे थे। मैंने कमल से कहा कि कमल तुम सुनाओ तुम्हारे ऑफिस की नौकरी कैसी चल रही है तो कमल ने मुझे बताया कि मेरी जॉब तो ठीक चल रही है लेकिन मैंने सोचा कि आज तुमसे जाकर मिल लेता हूं। मैंने कमल से कहा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम मुझसे मिलने के लिए आ गए मैं और कमल काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे तो उसी दौरान कमल ने मुझे कहा कि क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने के लिए चलें।

यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि काफी दिन हो गए हैं मैं कहीं गया भी नहीं हूं मैंने कमल से इस बात के लिए हामी भर दी और कमल को कहा कि तुम मुझे सोच कर बताना कि हमें कहां जाना चाहिए। कमल मुझे कहने लगा कि हां संजय मैं तुम्हें सोच कर इस बारे में बता दूंगा कमल दुकान पर करीब दो घंटे तक रुका और उसके बाद वह चला गया अब दुकान का काम मैं करने लगा था और कुछ कस्टमर भी वहां पर आए हुए थे इसलिए कमल चला गया था। कमल का फोन मुझे करीब दो दिन बाद आया जब दो दिनों बाद कमल का फोन मुझे आया तो मैंने कमल से कहा कि क्या तुमने सोच लिया है कि हम लोग कहां घूमने के लिए जा रहे हैं। कमल मुझे कहने लगा कि मेरी बात सुधीर से भी हुई थी तो सुधीर ने मुझे कहा है कि वह भी हमारे साथ चल रहा है और सुधीर ने हीं उसे बताया था कि हम लोगों को गोवा जाना चाहिए। मैंने भी कमल से कहा कि गोवा जाना हम लोगों के लिए ठीक रहेगा और हम तीनों ने ही गोवा जाने का फैसला कर लिया मैंने सुधीर को फोन कर के कहा तो सुधीर कहने लगा कि मैं भी तुम लोगों के साथ चल रहा हूं। वह भी अपने पापा की हार्डवेयर की शॉप संभालता है और अब हम लोग गोवा जाने की तैयारी कर रहे थे हम लोगों एक ट्रैवल एजेंट से मिले और उसने ही हमारी वहां पर टिकट बुक करवा दी और फिर हम लोगों की फ्लाइट की टिकट भी बुक हो चुकी थी। पापा और मम्मी को मैंने इस बारे में बता दिया था तो उस दिन मां ने ही मेरा सामान पैक करने में मेरी मदद की मां मुझे कहने लगी कि संजय बेटा तुम लोग वहां से कब लौटोगे। मैंने मां से कहा कि मां हम लोग वहां एक हफ्ते के लिए जा रहे हैं एक हफ्ते बाद हम लोग वहां से लौट आएंगे मां कहने लगी कि बेटा अपना ध्यान रखना मैंने मां से कहा मां मैं अब कोई छोटा बच्चा नहीं हूं आप चिंता ना करें। मां को हमेशा ही मेरी चिंता सताती रहती थी क्योंकि मैं घर में एकलौता हूं और बचपन से ही मां मुझे बहुत प्यार करती है। अगले दिन हम लोग गोवा के लिए निकल चुके थे और हम लोग जब एयरपोर्ट पहुंचे तो एयरपोर्ट से बाहर जाने के बाद हम लोगों ने वहां से टैक्सी ली और हम लोग होटल में चले गए जहां पर हम लोगों के रुकने की व्यवस्था थी। हम लोग गोवा में काफी खुश थे और शाम के वक्त हम लोग घूमने के लिए निकल गए।

जब हम लोग बीच पर गए तो बीच में हमने देखा कि वहां पर काफी ज्यादा भीड़ थी हम तीनों ही बीच के सामने के ही रेस्टोरेंट में बैठ गए वहां पर हम लोग काफी देर तक बैठे रहे और हम लोग ने वहां पर खाने का ऑर्डर भी दे दिया था। हम लोगों ने वहीं खाना खाया और फिर हम लोग होटल में वापस चले आए। अगले दिन हम लोग बीच में चले गए जब हम लोग बीच के किनारे बैठे हुए थे तो वहां पर मुझे दो लड़कियां दिखाई दी। मैंने जब उनकी तरफ देखा तो कमल और सुधीर भी कहने लगे यार क्या लड़कियां हैं। उन्होंने जिस प्रकार के कपड़े पहने हुए थे उन्हें देखकर बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन मेरी नजर तो एक लड़की पर भी लंबे बाल और गोरा चेहरा देखकर मैं उस पर मर मिटा। हमारी उनसे बात करने की हिम्मत नहीं हुई वह लड़कियां आपस में बात कर रही थी। मैंने किसी तरह उनसे बात करनी चाही और मैंने उनसे हाथ मिलाते हुए उनका नाम पूछा उन दोनों का नाम महिमा और सुहानी था। महिमा पर मेरा दिल आ चुका था मैंने उसे कहा क्या रात को हम लोग मिल सकते हैं वह कहने लगी क्यों नहीं। वह मुंबई से आई हुई थी महिमा को देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश था।

रात को हम लोगों ने डिनर किया और ड्रिंक भी की महिमा बहुत ज्यादा नशे में हो चुकी थी। महिमा से मेरी पहली मुलाकात थी पहली मुलाकात में मैं उसे अपने साथ होटल में ले आया था। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे वह मेरे साथ बैठी हुई थी हम दोनों एक ही कमरे में थे लेकिन जब मैंने महिमा के होंठों को चूमना शुरू किया तो वह मेरी तरफ देखने लगी उसे अच्छा लगने लगा था। वह जिस प्रकार से मेरे होठों को चूम रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने अपने लंड को बाहर निकाल दिया महिमा ने उसे देखकर अपने हाथों में लिया और उसे हिलाना शुरू किया। महिमा के कोमल हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड कठोर होने लगा था वह इतना ज्यादा कठोर हो चुका था कि वह महिमा की योनि के अंदर जाने के लिए बेताब था। मैंने महिमा को बिस्तर पर लेटा दिया और महिमा के कपड़े उतारे महिमा का बदन गरम हो चुका था। उसने एक छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी मैने उसकी काली चड्डी उतारकर उसकी चूत को चाटा वह अपने दोनों पैरों के बीच में मुझे जकड़ने की कोशिश करने लगी और कहने लगी मेरी चूत को चाटते रहो। मैंने उसकी चूत से बहुत ही ज्यादा पानी बाहर निकाल कर रख दिया था। वह मुझे कहने लगी मैं अपने आपको बिल्कुल नहीं रोक पा रही हूं मैंने उसके बूब्स को मुंह में लेकर चूसने लगा। अब मैंने उसकी चूत के अंदर लंड डालने की कोशिश की थी उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट महसूस हो रही थी। मैंने जब उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होता तो वह अपने मुंह से सिसकियां लेती और अपनी गरम सांसो से और भी ज्यादा गर्म करने की कोशिश करती। मैं उसके दोनों पैरों को खोल कर उसे बड़ी तीव्रता से धक्के मार रहा था मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था जिससे उसकी चूत पानी छोडने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही आनंद आ रहा है मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़े अच्छे से किया और थोड़ी देर बाद वह मेरे ऊपर से आ गई।

उसने मेरे लंड को अपनी योनि में समा लिया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर गया तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी बहुत मजा आ रहा है इस दर्द में भी इतना मजा आ रहा है कि बस तुमसे अपनी चूत मरवाती रहूं। मैंने उसकी चूतड़ों को पकड़ा हुआ था मैं उसकी चूत पर प्रहार कर रहा था वह भी अपनी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी जिस वजह से उसकी चूत से अलग ही प्रकार की आवाज आ रही थी। अब वह आवाज बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। मैंने काफी देर तक उसकी चूत का मजा ऐसा ही लिया फिर वह मुझे कहने लगी मैं अब ज्यादा देर तक तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगी। मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसकी चूत के अंदर मैंने वीर्य गिरा दिया।

उसे बहुत अच्छा लगा मैंने उसकी योनि के अंदर अपने माल को गिरा दिया था लेकिन कुछ देर बाद जब मेरा मन दोबारा से उसे चोदने का होने लगा तो मैंने उसे कहा महिमा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर उसे चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा मैं बड़े अच्छे से उसकी चूत मारना चाहता था। मैंने उसके पैरों को खोल लिया और अपने कंधों पर रख लिया मैंने जब उसकी चूत के अंदर धीरे-धीरे अपने लंड को डालना शुरू किया तो वह चिल्लाने लगी उसकी चूत के अंदर लंड चला गया। मैंने उसे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मारे जा रहा था। मैं उसे जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे मज़ा भी आ रहा था। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत मार कर आज बहुत खुश हूं तो महिमा कहने लगी मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है और तुम्हारे साथ सेक्स कर के मैं बहुत खुश हूं। मैंने उसकी चूत पूरी तरीके से फाड़ कर रख दी थी और अपने माल को जब मैंने उसकी चूत में गिराया तो मैं खुश हो गया और वह भी बड़ी खुश थी।

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