लंड लेने की आदत हो गई थी hindi sex stories

Antarvasna, hindi sex stories: मैं कुछ समय पहले ही दिल्ली नौकरी करने के लिए आया था जब मैं दिल्ली जॉब करने के लिए आया था तब मेरे लिए दिल्ली बिल्कुल ही नया था उससे पहले भी मैं कई बार अपने भैया के पास दिल्ली आया था लेकिन अब मैं दिल्ली में अकेले रहने लगा था। मेरे भैया दिल्ली में ही जॉब करते हैं और वह भाभी के साथ रहते हैं कुछ समय तक मैं उनके पास ही रहा लेकिन अब मैं अलग रहने लगा था क्योंकि मेरा ऑफिस उनके घर से काफी ज्यादा दूर था इसलिए मैंने अपने ऑफिस के सामने ही एक घर किराए पर ले लिया था और मैं वही रहने लगा था। मैं हर रोज सुबह जॉब पर चला जाता और शाम के वक्त घर लौटता मेरी यही दिनचर्या चली आ रही थी मेरे जीवन में कुछ भी नया नहीं हो रहा था। मुझे काफी महीने हो गए थे मैं अपने पापा मम्मी के पास रोहतक नहीं गया था तो मैंने सोचा कि कुछ दिनों के लिए मैं घर हो आता हूं और कुछ दिनों के लिए मैंने घर जाने का फैसला कर लिया। जब मैं घर गया तो पापा और मम्मी बहुत ही ज्यादा खुश थे काफी समय बाद मैं अपने घर गया था और कुछ दिनों तक मैं घर पर ही रुका।

उस बीच मैं अपने दोस्तों से भी मिला और जब मैं अपने दोस्तों से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा। एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे कहा कि तुम जल्दी जा रहे हो तो मेरे मामा जी की बेटी को कुछ पैसे देने थे मैंने उसे कहा ठीक है मैं उसे पैसे दे दूंगा और उसने मुझे उसका नंबर भी दे दिया था। उसके मामा जी भी रोहतक में ही रहते हैं लेकिन उसने मुझे बताया कि उनकी बेटी दिल्ली में पढ़ाई करती है, उसने मुझे पैसे दे दिए थे और मैं अगले दिन ही दिल्ली चला आया। मैं जब दिल्ली आया तो मैंने उसे फोन किया, मैंने जब कोमल को फोन किया तो कोमल ने फोन उठाया और मुझसे बात की मैंने उसे कहा कि मुझे गगन ने पैसे दिए थे और कहा था कि यह पैसे कोमल को देने हैं। कोमल ने मुझे कहा कि मैं आज शाम को आपसे पैसे ले लूंगी जब कोमल ने मुझे यह कहा तो मैंने उसे कहा ठीक है तुम मुझे शाम को मिल जाना। शाम के वक्त मैंने कोमल को अपने घर के पास ही एक रेस्टोरेंट का एड्रेस दिया था वहां पर हम दोनों मिले और जब मैंने कोमल को पहली बार देखा तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे उसे देखते ही मैं प्यार कर बैठा हूं उसकी नशीली आंखें मुझ पर जादू कर रही थी और मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था।

मैं चाहता था कि मैं कोमल से आगे भी बात करता रहूं उस दिन मैंने कोमल को पैसे दे दिए, यह हम दोनों की पहली ही मुलाकात थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं कर पाए। उसके बाद मैं वापस अपने घर लौट आया लेकिन उसके बाद भी एक दिन मैंने कोमल को मैसेज किया और कोमल से मैं अब मिलने लगा था हम दोनों की बातें फोन पर भी होने लगी थी। कोमल के साथ मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे को मिल भी लिया करते थे कोमल का यह ग्रेजुएशन का आखरी साल था और मैं जब भी उसे मिलता तो मैं उसे यह जरूर पूछा करता कि तुमने आगे क्या सोचा है लेकिन कोमल ने अभी तक तो कुछ सोचा नहीं था। वह कहने लगी कि अब तो यह सब पापा के ऊपर ही है कि वह क्या चाहते हैं मैं और कोमल एक दूसरे से जब भी मिलते तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और वह भी मुझसे मिलकर हमेशा खुश रहती। एक दिन मैंने कोमल को मिलने के लिए बुलाया वह मुझसे मिलने के लिए आई तो हम दोनों साथ में थे जब हम दोनों साथ में थे तो मैंने उस वक्त कोमल से अपने दिल की बात कह दी और कोमल को कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूं। पहली बार था जब कोमल को मैंने प्रपोज किया था लेकिन मुझे नहीं पता था कि कोमल इस बात से नाराज हो जाएगी और वह गुस्से में उस दिन वहां से चली गई। उसके बाद काफी दिनों तक हम दोनों की बात नहीं हुई लेकिन एक दिन मैंने कोमल को फोन किया तो उसने मेरा फोन उठाते हुए मुझे कहा कि अभी मैं कॉलेज में हूं मैं तुमसे बाद में बात करती हूं उसके बाद उसने मुझसे शाम के वक्त बात की। मैंने कमल से कहा कि कोमल मैंने तुम्हें अपने दिल की बात कही तो कोमल कहने लगी कि अविनाश मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती हूं इससे बढ़कर मैंने तुम्हारे बारे में कभी कुछ नहीं सोचा। मैंने कोमल को कहा लेकिन कोमल तुम इस बारे में मुझे कह भी तो सकती थी तुम गुस्से में चली गई तो मुझे लगा कि शायद हम दोनों के बीच में कुछ भी ठीक नहीं है अगर तुम मुझसे प्यार नहीं करती तो हम दोनों दोस्त बनकर साथ में रह सकते हैं।

कोमल और मैं अब दोबारा से बात करने लगे थे और हम दोनों की बात होने लगी थी मैं चाहता था कि कोमल मुझसे बात करते रहे और हम दोनों की दोस्ती वैसे ही बनी रहे जैसे कि पहले थी। अब दोबारा से हम दोनों की दोस्ती वैसे ही शुरू हो चुकी थी जैसे कि हम लोग पहले थे सब कुछ ठीक चल रहा था एक दिन मैंने कोमल से कहा कि क्या हम लोग आज मूवी देखने के लिए चल सकते हैं तो कोमल इस बात के लिए मान गई और हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए। कोमल काफी ज्यादा खुश थी और अब हम दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो चुका था क्योंकि कोमल नहीं चाहती थी कि वह किसी के साथ भी शादी से पहले कोई संबंध रखें इसीलिए उसने मुझे मना कर दिया था। उस दिन हम दोनों साथ में बैठकर मूवी देख रहे थे मूवी देखते देखते मेरा हाथ कोमल की जांघ पर चला गया उसने भी अपने हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया अब मैं धीरे-धीरे उसकी चूत की तरफ अपने हाथ को बढ़ाए जा रहा था और जैसे ही मैंने उसकी टाइट जींस के अंदर हाथ डालते ही उसकी चूत को सहलाना शुरु किया तो वह अपने आपको रोक नहीं पा रही थी और मुझे कहने लगी अविनाश ऐसा मत करो लेकिन वह बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी।

मैंने अपने आसपास देखा तो हमारे आस पास कोई नहीं बैठा हुआ था इसलिए मैं उसके होठों को चूमने लगा था मेरी नजर पीछे वाली सीट पर पड़ी वहां पर कोई भी नहीं था और हम दोनों वहां चले गए। मैंने कोमल से कहा तुम मेरे लंड को हाथों में ले लो उसने अपने हाथों में मेरे लंड को ले लिया। वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लिए जा रही थी और उसे बड़ा ही अच्छा लग रहा था उसने मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर बाहर किया तो मुझे मजा आने लगा जब मैंने उसके गले के अंदर तक लंड को घुसाया तो वह कहने लगी तुम्हारे लंड से पानी बाहर निकलने लगा है। अब मैं समझ चुका था कि मैं ज्यादा देर तक रह नहीं पाऊंगा इसलिए मैंने कोमल से कहा कि तुम अपनी जींस उतार दो। उसने अपनी जींस को उतारा और मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया तो मुझे उसकी चूत बहुत ही ज्यादा टाइट महसूस होने लगी मैंने जैसे ही एक झटके से उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो उसे मजा आने लगा वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मैंने उसकी चूत के अंदर तक अपने लंड को डाल दिया था मुझे बहुत ही मजा आया मैं उसे तेजी से धक्के देने लगा था। मैं जब ऐसा कर रहा था तो मेरे अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी और मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आ रहा था वह भी अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी लेकिन मुझे एहसास नहीं था कि उसकी चूत से खून निकल जाएगा और उसकी चूत से खून इतना ज्यादा निकलने लगा था कि वह मेरे लंड पर लगने लगा अब वह अपनी चूतडो को कुछ ज्यादा ही ऊपर नीचे करने लगी मैंने उसे कहा मेरे लंड को तुमने पूरी तरीके से छिल दिया है। उसकी मोटी गांड मेरे लंड से टकराती तो उसकी चूतडो से अलग प्रकार की आवाज आती और उसे मजा आता। मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था लेकिन जैसे ही मैंने उसे कहा कि अब मै तुम्हारी खुजली मिटाना चाहता हूं तो मैंने उसे कुर्सी पर लेटा दिया और उसके पैरों को खोल दिया।

अब मैं उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल चुका था जब मैंने ऐसा किया तो उसकी योनि के अंदर तक मेरा लंड चला गया और वह हल्के से चिल्लाई। मैंने उसके पैरों को पूरा चौड़ा कर लिया था मुझे ऐसा करना बहुत ही अच्छा लग रहा था अब मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के देना शुरू कर दिया था। मैंने उसे अब इतनी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए थे कि मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके पैरों को चौड़ा करने लगा वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी और मुझे कहने लगी मुझे और भी तेजी से चोदो। मैंने उसकी चूत मारकर उसकी इच्छा को पूरी कर दिया था लेकिन उसे मेरा लंड लेने की आदत हो चुकी थी और उस दिन के बाद वह मुझे मिलने के लिए बहुत बेताब रहती। अभी भी हम दोनों के बीच कोई रिलेशन नहीं था लेकिन मैं उसे चोदा करता कुछ दिनों पहले की बात है जब वह मुझसे मिलने के लिए आई हुई थी और उसने मेरे होंठों को चूमा और कहने लगी मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है।

मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने भी मेरे लंड को लपकते ही अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे अच्छे से चूसने लगी उसे बड़ा अच्छा लग रहा था और मुझे भी आनंद आ रहा था काफी देर तक उसने ऐसा ही किया लेकिन जब हम दोनों की गर्मी बढ़ने लगी तो मैंने उसे कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं तो वह कहने लगी तुम मेरी चूत मार लो उसने अपनी जींस को नीचे उतारते हुए अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ किया तो मैंने भी उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया। जब मैं ऐसा कर रहा था तो उसे मजा आ रहा था उसने मेरा साथ दिया और उसे मैंने बड़े अच्छे से चोदा मैंने उसकी इच्छा को पूरा कर दिया था