तकिए के ऊपर चूतड और चूत मे लंड desi kahani

Antarvasna, desi kahani: मुझे काफी समय हो गया था मैं अपने पापा मम्मी से नहीं मिल पाई थी मेरे पति आदित्य का ट्रांसफर लखनऊ हो गया जिसके बाद मैं दिल्ली नहीं जा पाई थी। एक दिन मम्मी ने मुझे फोन किया और कहने लगी कि सुमोना बेटा तुम कुछ दिनों के लिए दिल्ली आ जाओ काफी दिन हो गए तुम्हें देखा भी नहीं है मैंने मां से कहा हां मां मैं आदित्य से इस बारे में बात करती हूं। मैंने जब आदित्य से बात की तो वह कहने लगे की ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए दिल्ली चली जाओ। हम दोनों की शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं और मैं आदित्य के साथ बहुत ही खुश हूं आदित्य बैंक में जॉब करते हैं और आदित्य का परिवार भी दिल्ली में ही रहता है। आदित्य ने मुझे कहा कि सुमोना अगर तुम अपने घर जा रही हो तो कुछ दिन के लिए पापा मम्मी से भी मिल लेना मैंने आदित्य से कहा ठीक है। आदित्य ने मेरी ट्रेन की टिकट करवा दी थी और वह मुझे कहने लगे कि तुम वहां से वापस कब लौटोगी मैंने आदित्य से कहा कि जब मैं वहां से आने वाली होंगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी तुम उससे पहले मेरा टिकट करवा देना।

आदित्य कहने लगे ठीक है मैं तुम्हारा टिकट करवा दूंगा। मेरी ट्रेन की टिकट हो चुकी थी और दो दिन बाद मुझे आदित्य रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए आए। desi kahani दो दिन बाद मेरी ट्रेन थी और मैं दिल्ली के लिए ट्रेन में बैठ गयी जब मैं ट्रेन में बैठी तो उस वक्त आदित्य ने मुझे कहा कि सुमोना तुम अपना ध्यान रखना और अगर कोई परेशानी हो तो मुझे तुरंत फोन कर देना। मैंने आदित्य को कहा ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगी अगर मुझे ऐसा कुछ महसूस हुआ तो। मैं और आदित्य एक दूसरे से बातें कर रहे थे थोड़ी देर के बाद ट्रेन चलने वाली थी ट्रेन का हॉर्न जोर से बजा और उसके बाद ट्रेन चलने लगी तो आदित्य अभी भी वही खड़े थे। ट्रेन धीरे धीरे चलने लगी थी और आदित्य मुझे ही देख रहे थे मैं उनकी तरफ देख रही थी, ट्रेन ने भी अपनी गति पकड़ ली थी और आदित्य मेरी आंखों के सामने से अब काफी दूर हो चुके थे वह मुझे नजर नहीं आ रहे थे। मेरा दिल्ली तक का सफर काफी अच्छा रहा और मैं जब दिल्ली पहुंच गई तो दिल्ली रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही मैंने वहां से ऑटो ले लिया और ऑटो लेने के बाद मैं अपने घर चली गई। काफी दिनों बाद मैं पापा और मम्मी को मिली थी मेरी बहन अक्षिता भी मेरा इंतजार कर रही थी और वह मुझे कहने लगी कि दीदी आज मैं कॉलेज भी नहीं गई।

मैंने अक्षिता को कहा लेकिन तुम्हें कॉलेज जाना चाहिए था तो वह कहने लगी कि जब मुझे मां ने यह बात बताई कि आप कुछ दिनों के लिए घर आ रही है तो मैंने भी आज कॉलेज से छुट्टी ले ली। अक्षिता ने मुझे गले लगाते हुए कहा कि दीदी आपकी मुझे बहुत याद आती है, हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो मैंने मां से कहा मां पापा ऑफिस चले गए क्या तो मां कहने लगी कि हां बेटा वह ऑफिस चले गए हैं। हम लोग अब साथ में बैठे हुए थे तो मुझे मां कहने लगी कि क्या मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना दूं? मैंने मां से कहा हां मां मेरे लिए तुम नाश्ता बना दो। मैंने नाश्ता किया और उसके बाद मैं रूम में सोने के लिए चली गई अक्षिता भी मेरे पास में ही बैठी हुई थी लेकिन थोड़ी देर बाद वह मां के साथ काम करने लगी। जब मैं उठी तो मैं और मां साथ में ही थे हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे तो मैंने मां से कहा कि मां क्या पापा रिटायर होने वाले हैं तो मां कहने लगे कि हां सुमोना बेटा तुम्हारे पापा कुछ दिनों बाद रिटायर होने वाले हैं। मां कहने लगी काफी दिन हो गए थे जब हम लोग तुमसे मिले नहीं थे तो सोचा तुमसे मुलाकात भी कर लेंगे, हमें काफी अच्छा लगा जो तुम कुछ दिनों के लिए घर आ गई। उस दिन हम लोग शाम को साथ में शॉपिंग करने के लिए भी गए हमारे घर के पास ही एक मॉल है हम लोग शाम के वक्त वहीं चले गए थे और जब हम लोग वापस लौटे तो पापा भी ऑफिस से वापस लौट चुके थे। पापा कहने लगे कि सुमोना बेटा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम कुछ दिनों के लिए घर आ गई हमें तुम्हारी बड़ी याद आ रही थी सोचा कि काफी दिन हो गए तुमसे मिले भी नहीं है इसलिए सोचा कि तुम्हे फोन कर के कुछ दिनों के लिए बुला लेते हैं।

मैं और पापा कुछ देर तक साथ में रहे और फिर हम सब लोगों ने रात का डिनर साथ में किया कुछ दिनों तक मैं अपने घर पर ही थी मुझे काफी अच्छा लगा रहा था। मुझे आदित्य का फोन आया और वह कहने लगे कि सुमोना तुम कुछ दिनों के लिए पापा मम्मी से भी मिल आओ। आदित्य के पापा मम्मी घर पर अकेले रहते हैं तो मैं उनसे मिलने के लिए भी चली गई और मैं कुछ दिनों तक वहीं रहने वाली थी। जब मैं लखनऊ वापस जाने वाली थी तो मैंने आदित्य से कहा कि तुम मेरी टिकट करवा दो। आदित्य ने मेरी ट्रेन की टिकट करवा दी थी और उसके बाद मैं वापस लखनऊ लौट आई थी जब मैं लखनऊ लौटी तो आदित्य मुझे कहने लगे कि सुमोना घर पर सब कुछ ठीक तो है ना। मैंने आदित्य को बताया कि हां घर में सब कुछ ठीक है पापा मम्मी तुम्हें बहुत याद कर रहे थे आदित्य कहने लगे की कुछ दिनों बाद मैं सोच रहा हूं कि हम लोग घर चले जाएं। desi kahani मैंने आदित्य से कहा कि तुम भी मेरे साथ कुछ दिनों के लिए घर चल लेते तो अच्छा होता। आदित्य कहने लगे कि आजकल कुछ ज्यादा काम था इसलिए छुट्टी लेना मुश्किल था लेकिन कुछ महीनों बाद हम लोग घर चलेंगे तो मैंने आदित्य से कहा की ठीक है।

आदित्य सुबह बैंक चले जाया करते थे और मैं घर पर ही रहती थी एक दिन मैं अपने पड़ोस मैं अपनी सहेली सुमन के घर पर गई हुई थी जब मैं उसके घर पर गई तो उसके घर पर उसका भाई आया हुआ था। उसके भाई की चौड़ी छाती और उसकी कद काठी देखकर मैं उसकी तरफ मोहित हो गई और उसके साथ में एक बार तो सेक्स करना चाहती थी मैं जब घर आई तो उस दिन मैंने अपनी चूत के अंदर उंगली भी डाली और अपनी इच्छा को शांत करने की कोशिश की। रात को जब आदित्य आए तो मैंने उन्हें कहा कि आज मुझे तुम्हारे लंड को लेना है लेकिन आदित्य थके हुए थे उन्होने मेरी इच्छा को पूरा नहीं किया उसके बाद मे सुमन के भाई अक्षय पर डोरे डालने लगी थी और अक्षय भी मेरी बातों में आ गया था और वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गया। एक दिन मैंने उसे घर पर बुला लिया उस दिन आदित्य मुझे यह कह कर गए थे कि मुझे ऑफिस से लौटने में देर हो जाएगी। मेरे लिए यह अच्छा मौका था मैंने अक्षय को घर पर बुला लिया था जब वह घर पर आया तो वह मेरे पास आकर बैठा और मुझे कहने लगा आप तो बड़ी ही हॉट और सेक्सी हैं। मैंने उसे कहा तुम मेरे कपड़े उतारकर देख लो तुम्हें पता चल जाएगा कि मैं कितनी हॉट और सेक्सी हूं उसने भी मेरे कपड़ों को उतार दिया जब मैं उसके सामने नग्न अवस्था में थी तो उसने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया जब वह मेरे स्तनों को दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होता चला गया। उसकी उत्तेजना इस कदर बढ़ने लगी थी कि वह मुझे कहने लगा मुझे बहुत ही मजा आ रहा है तुम ऐसे ही मेरे बदन को महसूस करते रहो लेकिन जब उसने मेरी पैंटी को अपने हाथों से उतारकर मेरी चूत के अंदर उंगली डाली तो मैं जोर से चिल्लाई और उसने अपनी उंगली को पूरी चूत के अंदर तक घुसा दिया था लेकिन अब मेरी चूत उसके लंड को लेने के लिए बेताब थी उसने उस वक्त मेरी गर्मी को और भी अधिक कर दिया जब उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया जब वह ऐसा कर रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। अब मै कुछ ज्यादा ही गरम होने लगी थी मैंने उसे कहा तुम जल्दी से मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो और उसने मेरी चूत पर अपने लंड को लगाया तो मुझे एहसास हुआ कि मुझे उसके लंड को अपने मुंह के अंदर लेना चाहिए और मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारे लंड को अपने मुंह के अंदर लेना है।

मैंने जैसे ही उसके लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे अब और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा उसका 9 इंच काला मोटा लंड मेरा गले के अंदर जा रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उसके लंड की कठोरता बहुत ही ज्यादा थी और मुझे एहसास हो चुका था कि आज उसका लंड मेरी चूत को फाड़ कर ही रहेगा। मैंने उसे कहा तुम अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दो मैं उसके सामने अब लेट चुकी थी मैंने अपने गोरे बदन को उसे सौंप दिया था उसने भी अपने लंड पर थूक लगाया और जब उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को किया तो धीरे धीरे उसका लंड मेरी चूत मे घुसाना शुरू हो गया था मैं मचलने लगी। उसका लंड अभी आधा ही घुसा था मैं जोर से चिल्लाई और उसने मुझे कहा आप अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा लो मैंने भी अपनी चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर उठाया तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर चला गया था वह मुझे कहने लगा आप अपनी चूतड़ों के नीचे तकिया रख लो।

मैंने भी तकिए को अपनी चूतडो के नीचे रख लिया जब मैंने तकिए को अपनी चूतड़ों के नीचे रखा तो उसने अपनी पूरी ताकत के साथ मुझे चोदना शुरू कर दिया वह अब मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को इतनी तेजी से कर रहा था कि मेरी चूत पूरी तरीके से छिल चुकी थी और उसने मेरे पैरों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था जिस से कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था लेकिन मैं समझ चुकी थी कि मैं ज्यादा देर तक उसका साथ नहीं दे पाऊंगी इसलिए मैंने उसे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ना शुरू किया और जब मैं ऐसा कर रही थी तो उसको मेरी चूत बहुत टाइट महसूस होने लगी।desi kahani  हम दोनों ने करीब 10 मिनट तक चुदाई की और उसके बाद उसने मेरी योनि के अंदर अपने वीर्य को गिराकर मेरी इच्छा को पूरा किया मेरी इच्छा तो पूरी हो चुकी थी फिर वह अपने कपड़े पहनता हुआ अपनी दीदी के घर चला गया।

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