मुझे तो बस खुजली मिटानी थी

Antarvasna, desi kahani: पापा का ट्रांसफर अभी दो महीने पहले ही हुआ था और हम लोग पापा के साथ दिल्ली में ही रहने लगे थे दिल्ली में मैं ज्यादा किसी को जानती नहीं थी इसलिए मैं घर पर ही रहती थी। एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाली कमला आंटी घर पर आई, उनकी मम्मी के साथ काफी अच्छी बातचीत हो चुकी थी इसलिए उनका हमारे घर पर अक्सर आना-जाना लगा रहता था। वह जब भी घर पर आती तो काफी देर तक वह हमारे घर पर ही रहती थी उन्होंने मुझे कहा कि सुहानी बेटा तुम कहीं जॉब क्यों नहीं कर लेती तुम घर पर अकेले बोर हो जाती होगी तुम्हें कहीं नौकरी कर लेनी चाहिए। कमला आंटी की बात मुझे बिल्कुल सही लगी और मैंने उस दिन पापा से इस बारे में बात की पापा उस वक्त ऑफिस से लौटे ही थे और मैं उनके लिए पानी लेकर गई पापा ने पानी का गिलास मेज पर रखा और उसके बाद मैं पापा से बात करने लगी। मैंने उन्हें कहा कि पापा मैं नौकरी करना चाहती हूं तो उन्होंने मुझे कहा कि लेकिन सुहानी बेटा तुम्हें नौकरी करने की क्या आवश्यकता है। मैंने उन्हें बताया कि मैं घर पर अकेले बोर हो जाया करती हूं और सारा दिन सुबह से लेकर शाम तक मैं घर पर ही रहती हूं और आस पड़ोस में मेरा कोई भी दोस्त नहीं है इसलिए मैं नौकरी करना चाहती हूं।

पापा भी मेरी बातों को समझ चुके थे और उन्होंने मुझे कहा कि ठीक है सुहानी जैसा तुम्हें उचित लगता है। उन्होंने भी अब मेरी नौकरी के लिए हां कह दिया था तो अगले दिन से मैंने नौकरी ढूंढना शुरू कर दिया था। सुबह के वक्त मैंने अखबार खोलकर देखा तो उसमें काफी सारी वेकेंसियां आई हुई थी लेकिन मेरे हिसाब की कहीं भी नहीं थी, मैंने सिर्फ अपना पोस्ट ग्रेजुएशन ही पूरा किया था मेरे पास कोई भी एक्सपीरियंस नही था इसलिए मैं फिलहाल तो कहीं भी नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर पाई थी इस समस्या का समाधान भी कमला आंटी ने हीं निकाला।  कमला आंटी के घर पर उनके पति के दोस्त आये वह एक कंपनी में मैनेजर हैं तो कमला आंटी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम अपना रिज्यूम मुझे दे देना मैंने कमला आंटी को अपना रिज्यूम दे दिया और उसके बाद उन्होंने वह रिज्यूम अपने पति के दोस्त को दे दिया।

थोड़े समय बाद मेरी भी नौकरी एक कंपनी में लग चुकी थी मेरी नौकरी लग जाने के बाद जब पहले दिन मैं वहां पर गई तो मैं काफी असहज महसूस कर रही थी क्योंकि मैंने इससे पहले ना तो कभी नौकरी की थी और ना ही मुझे इसका कोई तजुर्बा था लेकिन मैं अपने काम को अच्छी तरीके से करती मेरा पहला ही दिन था इसलिए जो भी ऑफिस में आता उससे मैं बात कर लेती मेरा परिचय ऑफिस में सब लोगों से होने लगा था और मुझे अच्छा भी लगने लगा था। मैं सुबह के वक्त ऑफिस जाती और शाम के वक्त घर लौटती लेकिन समय का पता ही नहीं चलता था कब समय बीत जाता है। एक दिन मैं अपने घर लौट रही थी उस वक्त मैं बस स्टॉप पर ही खड़ी थी हमारे ऑफिस में काम करने वाली महिमा बस स्टॉप पर आई और वह मुझे कहने लगी कि सुहानी क्या तुम बस का इंतजार कर रही हो तो मैंने महिमा से कहा हां महिमा मैं बस का इंतजार कर रही हूं। थोड़ी ही देर बाद बस आई और हम दोनों बस में बैठ गए जब हम दोनों बस में बैठे तो मैंने कंडक्टर से दो टिकट के लिए कहा उसने दो टिकट दे दी। मैं और महिमा रास्ते में एक दूसरे से बात करते रहे मैंने महिमा से पूछा कि उसके परिवार में कौन-कौन है तो उसने मुझे बताया कि उसके परिवार में उसके बड़े भैया हैं जिनकी शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई थी और वह अब विदेश में नौकरी करते हैं। महिमा के पापा एक प्राइवेट संस्थान में नौकरी करते हैं और उसकी मां घर का हीं काम संभालती हैं मैंने भी महिमा को अपने बारे में बताया और हम लोगों की बातें उस दिन काफी देर तक हुई। मैं महिमा को इतना नजदीक से शायद कभी जान ही नहीं पाती ऑफिस में हम लोगों की इतनी बातें नहीं हुआ करती थी लेकिन उस दिन हम लोगों की काफी बातें हुईं। जब उस दिन मैं अपने घर पहुंची तो उसके बाद महिमा जैसे मेरी एक अच्छी दोस्त बन चुकी थी और जब भी मैं घर में अकेली होती तो मैं महिमा को फोन कर के घर पर ही बुला दिया करती थी।

महिमा के साथ मेरी अब काफी जमने लगी थी पापा और मां भी महिमा की बहुत तारीफ किया करते हैं एक दिन हम दोनों अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे उस दिन बस पूरी तरीके से भरी हुई थी और महिमा मुझे कहने लगी कि आज बस में कुछ ज्यादा ही भीड़ है। मैंने महिमा से कहा कि हां महिमा तुम ठीक कह रही हो हम दोनों को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल पाई थी महिमा मुझे कहने लगी कि कुछ दिनों के लिए उसके भैया घर आ रहे हैं। मैंने महिमा से कहा चलो यह तो काफी अच्छी बात है कि तुम्हारी भैया कुछ समय के लिए घर आ रहे हैं। हम लोग काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे और बात करने से सफर का पता ही नहीं चला मैं अपने बस स्टॉप पर उतर चुकी थी और उसके बाद मैं वहां से घर चली आई। महिमा ने मुझे ऑफिस में यह बताया की उसके भैया और भाभी को उसने सेक्स करते हुए देख लिया था उसे बहुत ही अच्छा लगा। वह अपनी बातों को जिस प्रकार से मुझे बता रही थी उससे मेरी भी चूत से पानी निकलने लगा था मैं यह सोच कर ही खुश हो रही थी कि उसके भैया ने किस प्रकार से उसकी भाभी की चूत उठा उठा कर मारी थी।

मैं भी ऐसा ही कुछ करना चाहती थी मैंने जब महिमा से यह बात पूछी कि क्या तुमने भी कभी किसी के साथ सेक्स किया है? उसने मुझे कहा हां उसने भी अपने पड़ोस के एक लड़के के साथ सेक्स किया था वह उसे अक्सर देखा करता था एक दिन महिमा ने उसे अपने घर पर बुलाया और उसके साथ उसने सेक्स के मजे लिए मैं भी चाहती थी मैं भी किसी के साथ ऐसे ही सेक्स करू। मैं जब उस दिन शाम के वक्त घर लौट रही थी तो हमारे पड़ोस में ही अमित नाम का लड़का रहता है। वह अक्सर मुझे देखा करता था लेकिन मैंने उसकी तरफ कभी देखा नहीं था परंतु उस दिन  मैंने उसे कहा कि तुम मुझे हमेशा ऐसे क्यों देखते हो। वह मुझे कहने लगा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मैंने अमित से कहा लेकिन तुम्हारे घर पर कौन-कौन है? वह मुझे कहने लगा आज मेरे घर पर कोई भी नहीं है मैं घर पर अकेला ही हूं। मेरे लिए तो बड़ा ही अच्छा मौका था मैं उस से सेक्स की इच्छा को पूरा करवाना चाहती थी। मैंने अमित से कहा तुम्हारे घर पर चलते हैं। अमित इस बात से बहुत ज्यादा खुश था उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे एक टाइट और फ्रेश माल मिलने वाला है लेकिन मैं तो अपनी चूत मे लंड लेने के लिए बडी बताब थी। जब अमित और मैं उसके घर पर गए तो अमित ने मुझे कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है। मैने अमित की पैंट की चैन को खोलते हुए उसके लंड को बाहर निकाला और उसे कहा मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती हूं। मैंने अमित के मोटे लंड को अपने मुंह में लिया और बडे अच्छे से सकिंग करना शुरू कर दिया। अमित के लंड को मैंने तब तक चूसा जब तक उसके लंड से पूरी तरीके से पानी बाहर नहीं आ गया और वह बहुत ज्यादा ही उत्तेजित हो चुका था। मेरे अंदर की गर्मी भी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मैं अपने आपको नहीं रोक पा रही थी। मैं अपने आप पर काबू नहीं कर पाई मैंने अमित से कहा तुम मेरे कपड़े उतारो उसने मेरे कपडे उतारे।

उसने अब मेरी चूत को सहलाना शुरू किया और मेरे स्तनों को दबाने लगा। वह एक हाथ से मेरे स्तनों को दबा रहा था और एक हाथ से वह मेरी चूत को दबाने की कोशिश कर रहा था मेरी चूत के अंदर उसने उंगली डालने की कोशिश की। जब वह मेरे ऊपर से आया तो मैंने अपने पैरों को खोल लिया और उसका मोटा लंड मेरी चूत से टकराने लगा था। मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही गिला पदार्थ बाहर की तरफ आने लगा था उसने मेरे होठों को अपने होठों में लिया और बड़े अच्छे से किस करने लगा। अमित ने अपने लंड को मेरी चूत पर सटा दिया और अंदर की तरफ धक्का देना शुरू किया तो मैं कुछ कह भी नहीं पाई वह मेरे होठों को अभी तक किस कर रहा था। उसने एक झटके से मेरी चूत के अंदर अपने मोटे लंड को प्रवेश करवा दिया था मैं बड़े जोर से चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन तब तक उसका लंड मेरी चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ जा चुका था मैं बहुत तेज आवाज मे चिल्लाने लगी थी।

उसने मेरे दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया था और वह जिस प्रकार से मुझे धक्के दे रहा था उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था मैं उसका साथ बडे अच्छे से देती। वह मेरी चूत के अंदर बाहर अपने मोटे लंड को कर रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ चुकी थी और मेरी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं भी उसके लंड को अपनी चूत मे लेकर बहुत ज्यादा खुश हो रही थी। उसने मुझे कहा मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदना चाहता हूं मुझे घोड़ी बनाकर चोदने में बहुत मजा आता है। मैंने उससे पूछा तुमने आज तक किस-किस को चोदा है उसने मुझे बताया कि उसने पड़ोस की एक भाभी को बहुत समय तक चोदा और उन्हें उसने प्रेग्नेंट कर दिया था। उसने अब मेरी चूत मारनी शुरू की मैंने भी उस से अपनी चूतड़ों को टकराना शुरू किया और काफी देर तक उसने मेरी चूत के मजे लिए लेकिन मेरी चूत की गर्मी को ना तो वह झेल सका और ना मैं उसके लंड की गर्मी को झेल पाई। उसके बाद मैने उसके साथ कभी सेक्स नहीं किया वह हमेशा सेक्स करने के बात मुझे कहता लेकिन मैं उसे मना कर दिया करती।

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